सुर्खी रोशनी को रजिस्ट्री नहीं बनाती। रामघाट, दत्त अखाड़ा, केदारेश्वर, सुनहरी घाट, भूखी माता घाट, महाकाल महालोक: 33,27,000 दीप। उसी दिन प्रदेश: 3,55,00,000 दीप, 845 आईकॉनिक जगह। दो संख्याएँ एक नहीं।

सायं 7 बजे सायरन। अतिथि, 25 हजार से अधिक वॉलिंटियर, श्रद्धालु। शिप्रा आरती में डॉ. यादव, श्री नवीन, श्री खंडेलवाल, श्री सिंघी। चित्र उसी शाम का फ्रेम है, 33 लाख दीयों का पूरा घाट नहीं।

जिलों की पंक्ति

विज्ञप्ति हर जिले की आईकॉनिक जगह गिनती देती है—बैतूल 144, श्योपुर 80, इंदौर 32, भोपाल 21। यह जगहों की तालिका है, दीयों की दोबारा गिनती नहीं।

कार्यक्रम प्रधानमंत्री श्री मोदी के जन्मदिवस और सेवा संकल्प से जुड़ा है। सुर्खी दीप और स्थान रखती है; 25 वर्षों की सेवा-कथा यहाँ लीड नहीं।