कभी घर की चारदीवारी तक सीमित रहने वाली ग्राम पटनाखुर्द की विभा सिंह दीदी आज अपनी मेहनत, समूह के सहयोग और आजीविका मिशन से मिले अवसरों के बल पर आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ रही हैं वह एम.ए. तक शिक्षा प्राप्त है, पति के स्थायी रोजगार नहीं होने से परिवार के भरण-पोषण और बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी भी चुनौती बनी हुई थी। ऐसे समय में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ना उनके जीवन में बदलाव की शुरुआत बना।
विभा दीदी बताती हैं कि 1 अप्रैल 2015 को उन्हें आजीविका मिशन की जानकारी मिली। साथी छाया दीदी के सहयोग से उन्होंने गांव की 10 महिलाओं को एकजुट कर विंध्यवासिनी स्वयं सहायता समूह का गठन किया। समूह में उन्हें सर्वसम्मति से सचिव की जिम्मेदारी दी गई। समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने धीरे-धीरे अपने संकोच को पीछे छोड़ा और आजीविका की नई राह पर कदम बढ़ाए।
छोटे ऋण से शुरू हुआ सफर, बढ़ता गया आत्मविश्वास
विभा दीदी ने समूह से 5 हजार रुपये का पहला ऋण लेकर सिलाई का काम शुरू किया। इसके बाद श्रीराम ग्राम संगठन से 20 हजार रुपये का ऋण लेकर आचार निर्माण का कार्य प्रारंभ किया। ऋण की समय पर अदायगी के बाद उन्होंने धान उपार्जन के लिए बैंक लिंकेज (CCL) से 2 लाख रुपये का ऋण लिया। कृषि कार्य के विस्तार के लिए ग्राम संगठन से 90 हजार रुपये तथा धान उपार्जन के लिए संकुल स्तरीय संगठन (CLF) से 4 लाख रुपये का ऋण लिया। इसके साथ ही ‘एक बगिया मां के नाम’ योजना के अंतर्गत कार्य के लिए 55 हजार रुपये का ऋण लिया।
विभा दीदी ने ऋण का उपयोग आजीविका गतिविधियों को बढ़ाने में किया और समय पर किश्तों की अदायगी को प्राथमिकता दी। कुल 7 लाख 70 हजार रुपये के ऋण में से वे 6 लाख 64 हजार रुपये की राशि ब्याज सहित वापस कर चुकी हैं। शेष राशि की किश्तों का भुगतान भी उनके द्वारा निरंतर किया जा रहा है।
विविध गतिविधियों से बनीं ‘लखपति दीदी’
आज विभा दीदी सिलाई, आचार निर्माण, कृषि एवं धान उपार्जन जैसी विभिन्न गतिविधियों से जुड़ी हैं। इन गतिविधियों से उन्हें प्रतिमाह लगभग 15 से 16 हजार रुपये की व्यक्तिगत आय प्राप्त हो रही है। आज वे ‘लखपति दीदी’ की श्रेणी में शामिल होकर अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने के साथ बच्चों की शिक्षा पर भी बेहतर ध्यान दे पा रही हैं।
अपनी सफलता के साथ विभा दीदी अब अन्य महिलाओं को भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित कर रही हैं। वे आजीविका मिशन में सीआरपी (CRP) के रूप में अन्य दीदियों को प्रशिक्षण एवं मार्गदर्शन प्रदान कर रही हैं। साथ ही एकता संकुल स्तरीय संगठन (CLF), बरबसपुर की अध्यक्ष के रूप में क्षेत्र की महिलाओं के समूहों का नेतृत्व कर रही हैं।
विभा दीदी अपनी इस बदलाव की यात्रा का श्रेय आजीविका मिशन, स्वयं सहायता समूह की दीदियों और उन्हें मिले सहयोग को देती हैं। उनका सफर बताता है कि अवसर और सही मार्गदर्शन मिलने पर ग्रामीण महिलाएं अपनी मेहनत और आत्मविश्वास के बल पर परिवार के साथ-साथ समाज में भी अपनी नई पहचान बना सकती हैं।






